काल सर्प दोष की शांति हेतु विशेष पूजा जिसमें राहु-केतु दोष की शांति, कुंडली विश्लेषण और नाग पूजन किया जाता है। यह पूजा त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में की जाती है।
काल सर्प दोष की शांति हेतु विशेष पूजा जिसमें राहु-केतु दोष की शांति, कुंडली विश्लेषण और नाग पूजन किया जाता है। यह पूजा त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में की जाती है।
मंगल दोष से पीड़ित जातकों के लिए त्र्यंबकेश्वर में वैदिक विधि से पूजा, जिससे विवाह, दांपत्य जीवन और क्रोध संबंधी समस्याओं में सुधार आता है।
त्र्यंबकेश्वर में पूर्वजों की शांति और अधूरी इच्छाओं की मुक्ति के लिए नारायण नागबलि और त्रिपिंडी श्राद्ध का विशेष विधान।
शनि, राहु, केतु, गुरु आदि ग्रहों के कुप्रभाव को शांत करने हेतु नवग्रह शांति, बीज मंत्र जाप और हवन द्वारा उपाय।
मंगल दोष, नाड़ी दोष या अन्य विवाह बाधाओं को समाप्त करने हेतु त्र्यंबकेश्वर में प्रतीकात्मक विवाह संस्कार जो विवाह में देरी को दूर करता है।
दीर्घायु, रोग नाश और मानसिक शांति हेतु महामृत्युंजय मंत्र का जाप व रुद्राभिषेक — यह पूजा भगवान त्र्यंबकेश्वर के सानिध्य में की जाती है।
बुरी नजर, ऊर्जा में बाधा और अकस्मात समस्याओं को दूर करने हेतु विशेष तांत्रिक पूजा और रक्षा सूत्र विधान।
जन्म कुंडली के माध्यम से दोषों की पहचान, उपाय एवं शुभ समय के चयन हेतु त्र्यंबकेश्वर के आचार्यों द्वारा परामर्श।
भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्ति हेतु वैदिक मंत्रों द्वारा रुद्र अभिषेक। यह पूजा रोग नाश, मानसिक शांति, बाधा मुक्ति और सौभाग्य वृद्धि के लिए त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में की जाती है।